सरगुजा में खूंखार हाथी का आतंक: 24 घंटे में 2 मौतें, अब तक 10 लोगों को कुचल चुका; ट्रैंक्यूलाइज कर रेस्क्यू सेंटर भेजने की तैयारी

सरगुजा/बलरामपुर, 30 सितंबर 2026। सरगुजा संभाग के जंगलों और गांवों में एक आक्रामक जंगली हाथी ने दहशत का माहौल बना दिया है। पिछले कई महीनों से बलरामपुर, सूरजपुर और सरगुजा जिले के जंगलों में अकेले घूम रहे इस हाथी के हमलों में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को खेत और जंगल जाने में भी डर लगने लगा है।
लगातार हो रही मौतों और ग्रामीणों में बढ़ते आक्रोश के बीच वन विभाग अब इस हाथी को ट्रैंक्यूलाइज कर रेस्क्यू सेंटर भेजने की तैयारी में है। संबंधित डीएफओ की ओर से राज्य सरकार को इसके लिए पत्र भेजा गया है। हाथी के आतंक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 24 घंटे में इसके हमले में दो लोगों की जान जा चुकी है।
29 सितंबर की शाम करीब 6 बजे बलरामपुर जिले के राजपुर वन परिक्षेत्र के ग्राम पंचायत परसवार कला में हाथी ने एक व्यक्ति को कुचलकर मार डाला। बताया गया कि वह अपने घर से करीब 500 मीटर दूर दूसरे मोहल्ले में अपनी बेटी के घर जा रहा था। इसी दौरान हाथी ने उस पर हमला कर दिया।
मृतक की पत्नी भी उसके पीछे चल रही थी। हाथी को देखकर उसने भागकर अपनी जान बचाई। आसपास मौजूद अन्य ग्रामीणों ने भी इधर-उधर भागकर खुद को बचाया।
वहीं सूरजपुर जिले के चंदोरा थाना क्षेत्र के दरहोरा गांव में धान के खेत में हाथी ने प्रमोद राजवाड़े नामक युवक पर हमला कर दिया। हाथी के कुचलने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
इन गांवों में भी हो चुके हैं जानलेवा हमले
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ महीनों में हाथी ने परसवार कला, शिवपुर, रेवतपुर और कल्याणपुर सहित कई इलाकों में लोगों को निशाना बनाया है।
लगातार हो रही घटनाओं के कारण ग्रामीणों में डर का माहौल है। कई परिवारों ने खेत और जंगल की ओर जाना तक कम कर दिया है। वन विभाग की टीमें और हाथी मित्र लगातार हाथी की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद जानमाल का खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
लगातार इंसानी मौतों के बाद ग्रामीण हाथी को जल्द पकड़कर सुरक्षित स्थान पर ले जाने की मांग कर रहे हैं। वन विभाग के सामने अब दोहरी चुनौती है—लोगों की जान बचाना और हाथी की भी सुरक्षा सुनिश्चित करना।
वन विभाग को आशंका है कि यदि हाथी के हमले इसी तरह जारी रहे और ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ा, तो हाथी की जान को भी खतरा पैदा हो सकता है।
अब ट्रैंक्यूलाइज कर रेस्क्यू सेंटर भेजने की तैयारी
हालात को देखते हुए वन विभाग ने हाथी को ट्रैंक्यूलाइज यानी नियंत्रित कर सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करने की योजना बनाई है। इसके लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।
यह सामान्य पकड़ने की प्रक्रिया नहीं है। एक वयस्क जंगली हाथी को ट्रैंक्यूलाइज करना बेहद जोखिमपूर्ण ऑपरेशन होता है और इसे प्रशिक्षित वन्यजीव विशेषज्ञों तथा अधिकृत पशु चिकित्सकों की निगरानी में ही किया जाता है।
ऑपरेशन के दौरान हाथी की स्थिति, उसकी गतिविधियों और आसपास के इलाके को ध्यान में रखते हुए रणनीति तैयार की जाती है। हाथी के बेहोश होने के बाद उसकी लगातार निगरानी की जाती है और उसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू सेंटर या निर्धारित स्थान तक पहुंचाया जाता है।
एक तरफ इंसानों की जान, दूसरी तरफ हाथी की सुरक्षा
वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि हाथी को नियंत्रित करते समय किसी इंसान या हाथी की जान न जाए। लगातार मौतों के कारण ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है, वहीं वन विभाग हाथी को किसी भी तरह की हिंसक कार्रवाई से बचाते हुए सुरक्षित रेस्क्यू करना चाहता है।
फिलहाल निगरानी टीम हाथी की लोकेशन और गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। राज्य सरकार से अनुमति और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ट्रैंक्यूलाइजेशन और रेस्क्यू ऑपरेशन आगे बढ़ाया जाएगा।
